आजम खान की याचिका पर SC का बड़ा फैसला, ED गिरफ्तारी मामले में हाईकोर्ट जाने का निर्देश

नई दिल्ली 05 नवंबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान की याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट को भेज दी है। आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। आरोप है कि 29 अक्टूबर को जेल से रिहा होने के महज 40 मिनट बाद ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

क्या है मामला?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि मामले को 16 नवंबर को सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच के सामने रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन के भीतर केस से जुड़े दस्तावेज हाईकोर्ट भेजने को भी कहा है।

सुनवाई के दौरान आजम खान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ED की गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि आजम खान को बाकी मामलों में जमानत मिल चुकी थी, लेकिन जेल से बाहर आते ही ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सिब्बल ने आशंका जताई कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान आजम खान को जेल में रखने के इरादे से यह कार्रवाई की गई है।

सिब्बल ने यह भी सवाल उठाया कि जिस घटना का मामला 2006 का है, उसकी FIR 2019 में दर्ज हुई।उन्होंने कहा कि शिकायतों में बकरियों और गायों को भी अपराध से कमाई गई संपत्ति यानी अपराध की कमाई बताया जा रहा है।

CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?

CJI सूर्यकांत ने कहा कि दलीलों में कुछ दम हो सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं देना चाहता।

आजम खान ने ED की गिरफ्तारी के साथ-साथ 1 नवंबर को स्पेशल कोर्ट की ओर से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश को भी चुनौती दी है। उन्होंने अंतरिम राहत के तौर पर जेल से रिहाई की मांग की है।

इससे पहले सपा नेता आजम खान को PMLA कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। जब मीडिया ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने कहा था, “अब कहने के लिए बचा ही क्या है?” गौरतलब है कि ईडी के सूत्रों ने बताया कि 2019 में आजम खान के खिलाफ 26 मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद एजेंसी ने 1 अगस्त 2019 को ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) के तहत केस दर्ज किया।