रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने कस्टम मिलिंग घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अनवर ढेबर के करीबी सहयोगी दीपेन चावड़ा को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उसे विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां जज ने चावड़ा को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। इस दौरान उससे घोटाले से जुड़े अहम राज़ जानने के लिए पूछताछ होगी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, दीपेन चावड़ा पहले से ही EOW में दर्ज अन्य मामलों में 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध धनराशि का प्रबंधक रह चुका है। कस्टम मिलिंग स्कैम में भी उसके खिलाफ ठोस सबूत मिले हैं। आरोप है कि उसने 20 करोड़ रुपए लोक सेवकों की ओर से वसूले और इन्हें अधिकारियों व नेताओं तक पहुंचाया।
फरवरी 2025 की कार्रवाई
इस घोटाले में फरवरी 2025 में तत्कालीन प्रबंध संचालक मनोज सोनी और रोशन चंद्राकर के खिलाफ विशेष न्यायालय (भ्र.नि.अ) में चालान पेश किया गया था। वहीं अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के खिलाफ जांच अभी भी जारी है।
जनवरी 2024 से शुरू हुई जांच
ED की रिपोर्ट के बाद EOW ने 29 जनवरी 2024 को पहली FIR दर्ज की थी। इसमें रोशन चंद्राकर, प्रीतिका, रिटायर IAS अनिल टुटेजा, एजाज ढेबर, सिद्धार्थ सिंघानिया और रामगोपाल अग्रवाल समेत कई नाम शामिल हैं।
कैसे हुआ घोटाला?
जांच में सामने आया कि मिलर्स से कस्टम मिलिंग के नाम पर वसूली की गई।
2020-21 से पहले मिलर्स को प्रति क्विंटल 40 रुपए भुगतान मिलता था।
कांग्रेस सरकार ने इसे बढ़ाकर 120 रुपए किया।
लेकिन मार्कफेड के अफसरों ने इसमें से 20 रुपए प्रति क्विंटल “कट” लेना शुरू कर दिया।
जो मिलर्स पैसे देते थे उन्हें भुगतान कर दिया जाता, जो मना करते थे उनका पैसा रोक दिया जाता।
इस तरीके से प्रदेश के 2700 मिलर्स से 140 करोड़ रुपए से अधिक की उगाही की गई। इसके अलावा डीओ काटने, मोटे धान को पतला, पतले धान को मोटा करने और एफसीआई से नान में कंवर्जन कराने जैसे कामों में भी भारी रिश्वतखोरी की गई।
