नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों “अमेरिका को महान बनाने” का कैंपेन चला रहे हैं। इसके तहत उन्होंने दूसरे देशों से आयात होने वाले सामान पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए हैं। ट्रंप का दावा है कि इससे सरकारी राजस्व बढ़ेगा और लोगों को फायदा होगा। हालांकि, येल विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट इसके विपरीत तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टैरिफ के कारण 2026 तक अमेरिका में करीब 8.75 लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे जा सकते हैं।
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने भी हाल ही में अमेरिकी टैरिफ के असर का आकलन किया। एजेंसी ने भारत की जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.9% किया है और कहा कि अमेरिकी टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित असर होगा। दरअसल, अमेरिका को होने वाला निर्यात भारत की जीडीपी का केवल 2% हिस्सा है। हालांकि, एजेंसी ने यह भी माना कि टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता निवेश पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी टैरिफ का भारत पर गहरा असर पड़ा है और इससे नौकरियां भी जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप अस्थिर स्वभाव के व्यक्ति हैं और वे कूटनीतिक आचार-व्यवहार के पारंपरिक मानकों का सम्मान नहीं करते।
थरूर ने कहा कि अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाली वस्तुओं पर 50% शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25% का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। उन्होंने दावा किया कि सूरत में रत्न एवं आभूषण उद्योग, समुद्री खाद्य और विनिर्माण क्षेत्रों में अब तक करीब 1.35 लाख लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों और टैरिफ पर आयोजित ‘क्रेडाई’ सम्मेलन में थरूर ने कहा, “ट्रंप बहुत ही अस्थिर व्यक्ति हैं और अमेरिकी शासन व्यवस्था राष्ट्रपति को बहुत अधिक शक्ति देती है।” उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को टैरिफ के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए अपने निर्यात बाजारों में विविधता लानी होगी।
