रायपुर, 20 सितंबर 2025।
छत्तीसगढ़ के नेट, सेट और पीएचडी धारक युवाओं ने लंबे इंतजार और निराशा के बाद आज रायपुर में प्रेस क्लब में एकत्र होकर सरकार से सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा शीघ्र कराने की जोरदार मांग की। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होती है तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में युवाओं ने बताया कि राज्य बनने के 25 सालों में सिर्फ तीन बार (2009, 2014 और 2019) ही सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा आयोजित की गई है। इस बीच बड़ी संख्या में महाविद्यालय खुले हैं, सेवानिवृत्ति और पदोन्नति से पद खाली हुए हैं, लेकिन 50 से 70 प्रतिशत पद अभी भी रिक्त हैं।
युवाओं का कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग की उपेक्षा के कारण छत्तीसगढ़ का कोई भी कॉलेज राष्ट्रीय रैंकिंग (NIRF) में शीर्ष 100 में जगह नहीं बना पाया है। नियमित सहायक प्राध्यापक भर्ती न होने से शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है और रिसर्च गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
युवाओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2019 में भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने विरोध किया था। सत्ता में आने के बाद सरकार ने सीबीआई जांच का वादा किया था, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। वहीं हाल ही में सरकार द्वारा सिर्फ 625 पदों पर भर्ती की घोषणा को उन्होंने “ऊंट के मुंह में जीरा” बताया।

युवाओं की प्रमुख मांगें:
1. भाजपा सरकार अपना वादा निभाते हुए 2169 पदों पर सहायक प्राध्यापक भर्ती करे।
2. छह साल से भर्ती न होने के कारण अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट दी जाए और एक बार के लिए 50 वर्ष तक का अवसर मिले।
3. सहायक प्राध्यापक भर्ती को नियमित कैलेंडर में शामिल कर हर कार्यकाल में परीक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष दलगंजन सिंह, संरक्षक डॉ. विजय व्यवहार, संयोजक होरीलाल यादव, सचिव डॉ. धर्मेंद्र, बेबी पटेल, क्षमता सिंह राजपूत, कविता ठाकुर, निलेश सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थी मौजूद रहे।
