शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन 23 सितंबर, मंगलवार को है। इस दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को तप, ज्ञान और साधना की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्त को रोगों से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
मां ब्रह्मचारिणी सफेद वस्त्र धारण करती हैं। उनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। मान्यता है कि उनकी उपासना से आलस्य, अहंकार, लोभ, असत्य, स्वार्थ और ईर्ष्या जैसी दुष्प्रवृत्तियां दूर होती हैं।
पूजा विधि
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर दीपक जलाएं।
मां दुर्गा को अक्षत, सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करें।
माता को बर्फी, चीनी, खीर और पंचामृत का भोग लगाएं।
धूप-दीप जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और आरती करें।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35 से 05:22 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: 11:49 से 12:37 बजे तक
विजय मुहूर्त: 02:14 से 03:03 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:16 से 06:40 बजे तक
अमृत काल: सुबह 07:06 से 08:51 बजे तक
मंत्र जाप
बीज मंत्र: “ह्रीं श्री अंबिकायै नमः”
साधना मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिणीयै नमः”
(कम से कम 108 बार जाप करने का विधान है)
मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग
मां ब्रह्मचारिणी को सफेद और हल्के रंग विशेष प्रिय माने गए हैं।
