राजधानी देहरादून में तैनात एक सरकारी शिक्षक ने लोगों को निवेश पर ऊंचा ब्याज देने का लालच देकर करीब 15 हजार लोगों से 47 करोड़ रुपये की ठगी की है। आरोपी शिक्षक ने यह ठगी पत्नी और परिजनों के नाम पर बनाई तीन कंपनियों के जरिये की। मामला सामने आने के बाद एसएसपी अजय सिंह ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।
मुनाफे का झांसा देकर की ठगी
पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी ने सर्व माइक्रो फाइनेंस इंडिया एसोसिएशन कंपनी, दून समृद्धि निधि लिमिटेड और दून इन्फ्राटेक कंपनी नाम से तीन संस्थाएं बनाई थीं। इन कंपनियों के जरिये दैनिक जमा, फिक्स्ड डिपॉजिट, मंथली इन्वेस्टमेंट और सुकन्या योजना में निवेश कराने के नाम पर ऊंचा ब्याज देने का लालच दिया गया।
निवेश की समयसीमा पूरी होने के बाद जब लोगों ने रकम वापस मांगी तो उन्हें टाल दिया गया। बाद में कंपनियों के संचालक फरार हो गए।
चार साल में 150 करोड़ का लेन-देन
जानकारी के अनुसार, इन तीनों कंपनियों के खातों से पिछले चार साल में 150 करोड़ रुपये तक का लेन-देन हुआ है। शनिवार को 50 से अधिक पीड़ित एसएसपी से मिलने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की। कई महिलाओं ने बताया कि उन्होंने रिश्तेदारों और परिचितों से पैसे लेकर निवेश किया था, लेकिन अब पूरी रकम डूब गई है।
खाते फ्रीज, आरोपी की तलाश
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि कंपनियों के दो बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं और छह अन्य खातों की जांच जारी है। मुख्य संचालकों की तलाश की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की संभावना है।
लोन लेकर लगाया पैसा
शिक्षा विभाग के कर्मचारी विनोद कुमार, निवासी पौड़ी गढ़वाल (वर्तमान पता कुंज विहार पटेलनगर), ने बताया कि उन्होंने आरोपियों के झांसे में आकर बैंक से लोन लेकर निवेश किया था। अब वह लोन की किश्तें चुका रहे हैं, जबकि निवेश की रकम वापस नहीं मिली।
रियल एस्टेट में भी लगाया पैसा
पीड़ितों ने बताया कि आरोपी शिक्षक ने दावा किया था कि कुमाऊं क्षेत्र में उसका रियल एस्टेट कारोबार चल रहा है और फ्लैट बनाए जा रहे हैं। ठगी की रकम का कुछ हिस्सा उसी में लगाया गया है। आरोपी के दो बच्चे उत्तराखंड के नामी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की पढ़ाई कर रहे हैं।
