टाटा ट्रस्ट्स से रतन टाटा के करीबी माने जाने वाले मेहली मिस्त्री को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और ट्रस्टी विजय सिंह ने मिस्त्री के खिलाफ वोट किया। मंगलवार, 28 नवंबर को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया, जिसके बाद ट्रस्ट के सदस्यों ने सर्वसम्मति से उनका कार्यकाल आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मेहली मिस्त्री ने अपने करीबी सहयोगियों को इस फैसले की जानकारी दी। बताया जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ ने पहले मिस्त्री के कार्यकाल को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली।
मंगलवार को पूरे दिन यह चर्चा रही कि मेहली मिस्त्री इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जा सकते हैं, हालांकि अब तक उन्होंने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है। वहीं महाराष्ट्र के सभी ट्रस्ट्स की देखरेख करने वाली संस्था चैरिटी कमिश्नर ऑफिस में भी इस मसले को लेकर हलचल देखी गई, लेकिन कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई।
गौरतलब है कि टाटा संस में सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 51 प्रतिशत है। इसी बीच, 17 अक्टूबर को हुई एक मीटिंग में भी कुछ मतभेद सामने आए थे। बताया गया कि एक ट्रस्टी ने मिस्त्री के उस प्रस्ताव पर असहमति जताई थी, जिसमें उन्होंने सभी पुनर्नियुक्तियों को पहले से स्वीकृत माना था। इस रवैये से अन्य सदस्य असहज महसूस कर रहे थे। हालांकि, मेहली मिस्त्री ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है।
