बिलासपुर में एसईसीएल कुसमुंडा, गेवरा, दीपका और कोरबा की खदानों से प्रभावित भू-विस्थापित किसानों ने अपनी ग्यारह सूत्रीय मांगों को लेकर एसईसीएल के सीएमडी कार्यालय का घेराव किया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और युवा शामिल हैं। वे अपनी लंबित रोजगार फाइलों, बसावट और मुआवजे की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक यह घेराव जारी रहेगा।
छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के संयुक्त नेतृत्व में यह घेराव हो रहा है। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा कई वर्षों से लंबित रोजगार का है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के बाद जन्मे युवाओं की फाइलें वर्षों से लंबित हैं, छोटे खातेदारों को रोजगार नहीं मिला है, और हजारों विस्थापित अब भी अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आंदोलनकारी नेताओं ने एसईसीएल प्रबंधन और सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गांव-गांव में हुई बैठकों और जनसंवाद के बाद ग्रामीणों ने इस आंदोलन को अभूतपूर्व समर्थन दिया है, लेकिन एसईसीएल और सरकार ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान आज तक नहीं किया है।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेता प्रशांत झा ने बताया कि प्रदर्शनकारी अपनी 11 मांगों पर तुरंत कार्रवाई चाहते हैं। इन मांगों में 1978 से 2004 के बीच जमीन देने वाले परिवारों को रोजगार देना, फाइलों का जल्दी निपटारा, बसावट की व्यवस्था, उचित मुआवजा और आउटसोर्सिंग कंपनियों में विस्थापितों को 100 नौकरियां देना शामिल है।
इसके साथ ही जरहाजेल गांव की मूल जमीन वापस करने और मनगांव बसावट पर हो रही कार्रवाई रोकने की मांग भी लगातार उठाई जा रही है।
एसईसीएल के पीआरओ डॉ. सनीश चंद्र ने कहा कि प्रदर्शन करने वालों के पास कोई मजबूत वजह नहीं दिख रही है। उनका उद्देश्य सिर्फ मुख्यालय में प्रदर्शन करके दबाव बनाना लगता है।
उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से क्षेत्रीय महाप्रबंधक और निदेशक स्तर पर उनकी कई बार बातचीत हो चुकी है, और कई मुद्दों पर जरूरी कार्रवाई भी चल रही है।
पीआरओ ने कहा, नियमों के खिलाफ नौकरी की मांग करना, तय से ज्यादा मुआवजा मांगना और मांगें न मानने पर खदान बंद करने या मुख्यालय में प्रदर्शन करना यह न्यायोचित नहीं प्रतीत होता।
