नई दिल्ली।
कई सालों से वेतन संकट से जूझ रहे किंगफिशर एयरलाइंस के सैकड़ों पूर्व कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। इस मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्मचारियों को बकाया वेतन भुगतान पर सहमति जताते हुए इसके लिए 311.67 करोड़ रुपये की राशि बहाल कर दी है। इससे करीब 13 साल से लंबित वेतन विवाद के खत्म होने की उम्मीद जगी है।
गौरतलब है कि किंगफिशर एयरलाइंस को 20 अक्टूबर 2012 को बंद कर दिया गया था, जिसके बाद से ही कर्मचारी अपनी बकाया सैलरी के लिए संघर्ष कर रहे थे।
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DRT के आदेश के बाद संभव हुई बहाली
ईडी ने यह बहाली 12 दिसंबर 2025 को ऋण वसूली अधिकरण–I (DRT-I), चेन्नई के रिकवरी ऑफिसर द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में सुनिश्चित की है। आदेश में उन संलग्न शेयरों की बिक्री से प्राप्त धनराशि जारी करने के निर्देश दिए गए थे, जिन्हें पहले धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ईडी द्वारा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को बहाल किया गया था।
कर्मचारियों तक ऐसे पहुंचेगा पैसा
बहाल की गई राशि को अब आधिकारिक परिसमापक (Official Liquidator) को स्थानांतरित किया जाएगा, जिसके माध्यम से किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व कर्मचारियों को उनका लंबे समय से लंबित वेतन वितरित किया जाएगा।
ईडी जांच में क्या सामने आया
ईडी ने किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड (KAL), विजय माल्या और उनसे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज बैंक धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामलों के आधार पर कई ECIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। ये मामले PMLA के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आते हैं।
जांच में सामने आया कि किंगफिशर एयरलाइंस द्वारा लिए गए कर्ज का एक बड़ा हिस्सा:
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अन्य बैंकों और ऋणदाताओं के पुराने कर्ज चुकाने
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बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा डिस्काउंट किए गए डॉक्यूमेंटरी बिलों के निपटान
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विमान लीज रेंटल और विमान पार्ट्स की खरीद के नाम पर विदेशों में बड़ी रकम भेजने
में इस्तेमाल किया गया था।
ईडी का कहना
ईडी ने कहा है कि यह कार्रवाई पीड़ित-केंद्रित बहाली के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है और इससे किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों को वर्षों बाद न्याय मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
