CGMSC योजना में 550 करोड़ का महाघोटाला, EOW ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ की आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हमर लैब’ योजना में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में सुनियोजित धोखाधड़ी कर शासन को करीब ₹550 करोड़ की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 19 जनवरी 2026 को रायपुर स्थित विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने उन्हें 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
गिरफ्तार आरोपी
EOW द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं—
अभिषेक कौशल – डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि., पंचकुला
राकेश जैन – प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर
प्रिंस जैन – लाईजनर, रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. (बताया जा रहा है कि वह शशांक चोपड़ा का जीजा है)
फर्जी निविदा और कार्टेलाइजेशन का खुलासा
विवेचना में सामने आया है कि जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट्स की खरीदी हेतु पूल टेंडरिंग प्रणाली अपनाई गई थी। जांच में यह पाया गया कि मोक्षित कॉर्पोरेशन को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर में भाग लिया।
EOW के अनुसार, प्रतिस्पर्धा को समाप्त करने के लिए इन फर्मों ने आपसी मिलीभगत कर कार्टेलाइजेशन किया। शॉर्टलिस्ट हुई तीनों फर्मों ने टेंडर में उत्पादों के नाम, पैक-साइज़ और रिएजेंट्स का विवरण एक ही पैटर्न और समान भाषा में भरा। यहां तक कि जिन उत्पादों के नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट नहीं थे, उन्हें भी तीनों फर्मों ने एक जैसा दर्शाया।
एमआरपी से तीन गुना दर पर खरीदी
जांच में यह भी सामने आया कि इस मिलीभगत के जरिए मोक्षित कॉर्पोरेशन ने सबसे कम दर (L-1) कोट की, जबकि वास्तविकता में ये दरें एमआरपी से तीन गुना तक अधिक थीं। इस तरह शासन को अनुचित भुगतान करना पड़ा, जिससे सरकारी खजाने को लगभग ₹550 करोड़ का नुकसान हुआ।
जांच जारी, और गिरफ्तारियों के संकेत
EOW ने संकेत दिए हैं कि यह मामला और भी व्यापक हो सकता है। निविदा प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों, फर्मों और बिचौलियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।