2000 करोड़ की कफ सीरप तस्करी का भंडाफोड़, सरगना शुभम जायसवाल के तीन करीबी गिरफ्तार

नेपाल भागने की फिराक में थे आरोपी, सिद्धार्थनगर से वाराणसी पुलिस ने दबोचा

वाराणसी। करीब दो हजार करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय कफ सीरप तस्करी नेटवर्क के सरगना शुभम जायसवाल के तीन करीबी आरोपितों को वाराणसी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है। तीनों आरोपित नेपाल भागने की फिराक में सीमा तक पहुंच चुके थे, लेकिन एसआईटी की सतर्कता से उन्हें सिद्धार्थनगर जिले के मोहाना थाना क्षेत्र स्थित गणेशपुर से मंगलवार को धर दबोचा गया।

गिरफ्तार आरोपितों में आजमगढ़ निवासी विकास सिंह नरवे, वाराणसी निवासी आकाश पाठक और जौनपुर निवासी अंकित श्रीवास्तव शामिल हैं। विकास सिंह नरवे और आकाश पाठक पर पुलिस ने 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। तीनों के खिलाफ पहले से ही लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका था।

पुलिस के अनुसार, विकास सिंह ने ही मुख्य आरोपितों में शामिल अमित टाटा और सेवानिवृत्त सिपाही आलोक सिंह की मुलाकात सरगना शुभम जायसवाल से कराई थी, ताकि कफ सीरप तस्करी के नेटवर्क को देश के बाहर तक फैलाया जा सके। अमित टाटा और आलोक सिंह को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

गौरतलब है कि सोनभद्र पुलिस ने पिछले वर्ष 18 अक्टूबर को कफ सीरप की शीशियों से भरे दो कंटेनर पकड़े थे, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि कफ सीरप गाजियाबाद से झारखंड के रांची भेजे जा रहे थे। यह अवैध कारोबार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ बांग्लादेश और नेपाल तक फैला हुआ था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में नाम सामने आते ही सरगना शुभम जायसवाल परिवार के साथ दुबई फरार हो गया। उस पर वाराणसी पुलिस ने 50 हजार और सोनभद्र पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।

वाराणसी में औषधि विभाग के निरीक्षक जुनाब अली ने 19 नवंबर को थाना कोतवाली में शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल समेत 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद शुभम, विकास सिंह नरवे, आकाश पाठक, दिवेश जायसवाल, अमित जायसवाल और अंकित श्रीवास्तव के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया।

एसआईटी के मुखिया डीसीपी गौरव बंसवाल ने बताया कि विकास सिंह देवनाथ फार्मेसी का संचालक था। उसने शुभम के पिता भोला प्रसाद जायसवाल की रांची स्थित फर्म शैली ट्रेडर्स से 5.13 लाख शीशी कोडीनयुक्त कफ सीरप की खरीद कर लगभग 15 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किया। उसकी भूमिका पूरे नेटवर्क से अर्जित काले धन के प्रबंधन की थी। जांच में विकास के कई बार दुबई जाने के साक्ष्य भी सामने आए हैं।

वहीं, आकाश पाठक की फर्जी दवा कंपनी मेड रेमेडी लाइफकेयर प्राइवेट लिमिटेड के लिए शुभम जायसवाल ने अपने हस्ताक्षर से कंपीटेंसी सर्टिफिकेट जारी कराया था, जिसके आधार पर कंपनी को लाइसेंस मिला। आकाश की कंपनी में शुभम जायसवाल निदेशक पद पर भी दर्ज था।

फिलहाल तीनों गिरफ्तार आरोपितों को वाराणसी लाया जा रहा है। पूछताछ के बाद उन्हें बुधवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।