भारत की इनकम टैक्स व्यवस्था अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू करने जा रही है। इसके साथ ही करीब 60 साल पुराना इनकम टैक्स एक्ट, 1961 खत्म हो जाएगा।
नए कानून को लागू करने के लिए सरकार ने इनकम टैक्स रूल्स, 2026 का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें नए और संशोधित ITR फॉर्म्स भी शामिल हैं। सरकार ने इन्हें पब्लिक डोमेन में रखा है और 22 फरवरी 2026 तक लोगों से सुझाव मांगे हैं। इसके बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
🔴 अब डिजिटल फाइलिंग ही होगी सामान्य नियम
नए टैक्स नियमों के तहत इनकम टैक्स रिटर्न अब लगभग पूरी तरह ऑनलाइन ही भरना होगा।
सिर्फ 80 साल या उससे अधिक उम्र के सुपर सीनियर सिटीजन को ही कागज पर रिटर्न भरने की छूट मिलेगी। बाकी सभी टैक्सपेयर्स को ऑनलाइन, EVC या डिजिटल सिग्नेचर से रिटर्न फाइल करना होगा।
🧾 ITR-1 (सहज): सिर्फ आसान मामलों के लिए
ITR-1 पहले की तरह उन लोगों के लिए रहेगा जिनकी इनकम –
-
सैलरी
-
एक घर से किराया
-
बैंक ब्याज जैसे साधारण स्रोतों से है
सरकार ने साफ किया है कि यह फॉर्म सिर्फ बिल्कुल सीधे-साधे मामलों के लिए ही होगा। जरा सा मामला जटिल होते ही ITR-1 का विकल्प खत्म हो जाएगा।
🧾 ITR-2: कैपिटल गेन और विदेशी इनकम वालों के लिए
अगर किसी टैक्सपेयर के पास –
-
शेयर या प्रॉपर्टी से कैपिटल गेन
-
एक से ज्यादा मकान
-
विदेशी इनकम या विदेशी संपत्ति
है, तो उसे ITR-2 भरना होगा।
नए नियमों में इस फॉर्म में ज्यादा जानकारी और ज्यादा डिटेल देना अनिवार्य होगा।
🧾 ITR-3: बिजनेस और प्रोफेशन वालों पर बढ़ेगा बोझ
जो लोग बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई करते हैं, उनके लिए ITR-3 ही फॉर्म रहेगा।
लेकिन अब इसमें –
-
ज्यादा खुलासे
-
ज्यादा कैपिटल गेन डिटेल
-
पर्क्विजिट्स और स्पेशल इनकम की जानकारी
देनी होगी। यानी बिजनेस टैक्सपेयर्स के लिए कंप्लायंस बढ़ेगा।
⚠️ ITR-4 (सुगम) अब पहले जैसा आसान नहीं
सबसे बड़ा बदलाव ITR-4 में किया गया है। अब ये फॉर्म नहीं भर पाएंगे वे लोग जो –
-
विदेशी इनकम या एसेट रखते हैं
-
किसी कंपनी के डायरेक्टर हैं
-
अनलिस्टेड शेयर रखते हैं
-
सालाना इनकम 50 लाख से ज्यादा है
-
दो से ज्यादा घर हैं
-
पुराना घाटा (Loss) आगे ले जा रहे हैं
-
खेती से 5,000 रुपये से ज्यादा इनकम है
इसका मतलब साफ है कि कई छोटे कारोबारी अब ITR-4 से बाहर होकर ITR-3 में जाएंगे।
🏢 ITR-5 और ITR-6: कंपनियों और फर्मों पर सख्ती
फर्मों और कंपनियों के लिए ITR-5 और ITR-6 पहले जैसे ही रहेंगे, लेकिन –
-
डिजिटल कंप्लायंस
-
ऑडिट रिपोर्ट
-
डेटा लिंकिंग
को और सख्त किया गया है। कंपनियों के लिए डिजिटल सिग्नेचर से फाइलिंग अनिवार्य रहेगी।
🏛️ ITR-7: ट्रस्ट और संस्थानों पर कड़ी नजर
चैरिटेबल ट्रस्ट, NGO और राजनीतिक पार्टियों के लिए ITR-7 में अब –
-
डोनेशन की पूरी जानकारी
-
फंड के इस्तेमाल का ब्यौरा
-
ऑडिट रिपोर्ट
सीधे रिटर्न से लिंक होगी। गलती या देरी पर टैक्स छूट और रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है।
❓ सरकार बदलाव क्यों कर रही है?
सरकार का साफ उद्देश्य है –
-
टैक्स फाइलिंग पूरी तरह डिजिटल हो
-
गलत रिटर्न पर लगाम लगे
-
ज्यादा पारदर्शिता आए
-
टैक्स सिस्टम डेटा आधारित बने
सरकार ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। 22 फरवरी 2026 तक टैक्सपेयर्स और एक्सपर्ट्स सुझाव दे सकते हैं।
