वन विभाग के बढ़ते दबाव के बीच फरार आरोपी ने कोर्ट में किया सरेंडर

संजू पैकरा/बलौदाबाजार 15 मार्च 2026

वन्यजीव अपराध में फरार आरोपी ने किया आत्मसमर्पण, गिरफ्तार कर भेजा गया जेल

वन्यजीव अपराध के एक मामले में फरार चल रहे आरोपी ने वन विभाग की लगातार बढ़ती दबिश और तलाश अभियान के दबाव में अंततः न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय के आदेश के बाद उसे गिरफ्तार कर जिला जेल बलौदाबाजार भेज दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए मिली गुप्त सूचना के आधार पर वन मण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील के निर्देश पर जनवरी माह में वन विभाग की टीम ने ग्राम अल्दा में तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी के दौरान संदिग्ध व्यक्ति शिवसेवक के घर से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) की अनुसूची-I में संरक्षित वन्यजीवों से संबंधित तेंदुए के दांत, जंगली जानवर के मांस के टुकड़े, जीआई तार, भाले सहित अन्य सामग्री जब्त की गई थी।

कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी शिवसेवक मौके से जंगल की ओर फरार हो गया था। आरोपी की तलाश के लिए वन विभाग ने तत्काल टीम गठित कर सघन खोज अभियान चलाया और डॉग स्क्वाड की सहायता भी ली। हालांकि घने जंगल की ओर भाग जाने और शाम हो जाने के कारण उस दिन आरोपी को पकड़ा नहीं जा सका। इसके बाद विभाग द्वारा लगातार उसकी तलाश जारी रखी गई।

वन विभाग की लगातार दबिश के चलते मुख्य आरोपी शिवसेवक पिता परदेशी राम गोड, निवासी ग्राम अल्दा, पोस्ट भिभोरी, तहसील कसडोल ने अंततः बुधवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कसडोल की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद आरोपी को विधिवत गिरफ्तार किया गया और आवश्यक पूछताछ व कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे पुनः न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे जिला जेल बलौदाबाजार भेज दिया गया।

प्रकरण में एक अन्य सहयोगी आरोपी मेहतारू पिता सरजू (43 वर्ष) पहले से ही न्यायिक अभिरक्षा में है। उसके घर की तलाशी के दौरान सॉफ्ट शेल कछुए का प्लास्ट्रॉन (अनुसूची-I) तथा लंगूर की खोपड़ी (अनुसूची-II) बरामद की गई थी।

इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) के प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है और जांच जारी है।

कार्रवाई में उप वनमंडलाधिकारी निश्चल शुक्ला, वनपरिक्षेत्र अधिकारी सुश्री श्वेता कुमारी सिंह के नेतृत्व में परिक्षेत्र सहायक जय किशन यादव, नटवर लाल वर्मा सहित वन विभाग के कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।