छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी कोर्ट में कवासी लखमा और चैतन्य बघेल समेत 59 आरोपी पेश, 3200 करोड़ घोटाले की जांच तेज

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में गुरुवार को ईडी की स्पेशल कोर्ट में बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल समेत 59 आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। इनमें 28 आबकारी अधिकारी भी शामिल हैं। कोर्ट ने सभी आरोपियों के धारा 88 के तहत बयान दर्ज किए।

एडवोकेट फैजल रिजवी ने बताया कि इस मामले में ईडी पहले ही कोर्ट में अभियोग पत्र पेश कर चुकी है। हाल ही में एजेंसी ने फाइनल अभियोग पत्र दाखिल किया है, जिसमें पहले 23 आरोपी थे, जिन्हें बढ़ाकर अब 59 कर दिया गया है। इस केस में अब तक कुल 82 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है।

बताया जा रहा है कि जांच के दौरान इन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था और बिना गिरफ्तारी के ही उनके खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है। वहीं कई आरोपियों ने सीआरपीसी के तहत आवेदन भी लगाया है।
शराब कंपनियों पर भी हुई कार्रवाई

इस मामले में जांच कर रही आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने तीन दिन पहले दो शराब निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान कंपनियों के ट्रकों को जब्त किया गया।
इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में कार्यरत एक अकाउंटेंट समेत चार लोगों को पूछताछ के लिए ईओडब्ल्यू दफ्तर तलब किया गया था। इन सभी से कई घंटों तक पूछताछ की गई।
फरार कोषाध्यक्ष की तलाश
शराब घोटाले की जांच कर रही ईडी और ईओडब्ल्यू प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की भी तलाश कर रही हैं। बताया जा रहा है कि वे पिछले कई वर्षों से फरार हैं। एजेंसियां उनकी भूमिका को लेकर गंभीरता से जांच कर रही हैं और उनसे जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ के कथित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी ने एसीबी में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार मामले में अभी और भी कई अहम खुलासे होने की संभावना है।