जग्गी हत्याकांड: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को 3 सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार देते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

यह फैसला हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अमित जोगी को तीन हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फिर खुला था मामला

वर्ष 2003 में हुए इस चर्चित हत्याकांड में पहले सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले को दोबारा हाईकोर्ट में रीओपन किया गया।

मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अदालत में करीब 11 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट पेश की थी। इसी विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर अमित जोगी पर आरोप तय किए गए और अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें दोषी माना।

परिवार ने बताया राजनीतिक साजिश

सुनवाई के दौरान स्वर्गीय रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अदालत में कहा कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश के तहत की गई थी। उन्होंने बताया कि सीबीआई की चार्जशीट में हत्या से जुड़े पर्याप्त सबूत शामिल हैं।

फैसले पर अमित जोगी की प्रतिक्रिया

हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने कहा कि उन्हें पूरी तरह से सुनवाई का मौका नहीं दिया गया और अचानक दोषी करार देना उनके लिए अप्रत्याशित है। उनका कहना है कि उनके साथ अन्याय हुआ है।

पहले ट्रायल कोर्ट से मिल चुकी थी राहत

बता दें कि वर्ष 2007 में ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को इस मामले में बरी कर दिया था। हालांकि सीबीआई और शिकायतकर्ता ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी आधार पर खारिज की गई सीबीआई की अपील को पुनः बहाल कर दिया था, जिसके बाद इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू हुई और अब हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है।