SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: चुनाव आयोग की कार्रवाई वैध, संदिग्ध वोटरों की सूची 4 हफ्ते में केंद्र को भेजने के निर्देश

नई दिल्ली 27 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया अवैध नहीं है और चुनाव आयोग ने कानून के अनुसार कार्रवाई की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम संदिग्ध पाए गए हैं या जिन्हें सूची से हटाया गया है, उनकी जानकारी केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर भेजी जाए। अदालत ने यह भी कहा कि पारदर्शिता और निष्पक्षता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मूल शर्त है, इसलिए मतदाता सूची का समय-समय पर सत्यापन आवश्यक है।

कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद SIR प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां इसे मतदाताओं को बाहर करने की कार्रवाई बता रहे थे, वहीं चुनाव आयोग ने अदालत में कहा कि पूरी प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व कानून और निर्धारित नियमों के तहत की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार करते हुए चुनाव आयोग को आगे की कार्रवाई नियमानुसार जारी रखने की अनुमति दी है। अब केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।