उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए नया नियम, साल में सिर्फ 4 सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलेगी

नई दिल्ली 09 जून 2026 : प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) में केंद्र सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया है. अब योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले LPG सिलेंडरों की संख्या घटा दी गई है. पहले जहां लाभार्थियों को सालभर में ज्यादा सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते थे, वहीं अब यह संख्या घटाकर सिर्फ 4 कर दी गई है. सरकार का कहना है कि यह फैसला लाभार्थियों की वास्तविक खपत और सरकारी खर्च को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.बता दें कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत 2016 में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी. शुरुआत में योजना के तहत, 14.2 किलोग्राम वाले 12 एलपीजी सिलेंडर सब्सिडी के साथ उपलब्ध कराए जाते थे. बाद में सरकार ने इस संख्या को घटाकर 9 कर दिया और अब इसे और कम करते हुए 4 सिलेंडर कर दिया गया है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा के मुताबिक, यह नई सीमा उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत सालाना गैस खपत के करीब है. सरकार का मानना है कि अधिकांश लाभार्थी सालभर में लगभग इतनी ही गैस का उपयोग करते हैं.सरकार ने मई 2022 में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए प्रति सिलेंडर 200 रुपये की लक्षित सब्सिडी शुरू की थी. बाद में अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया. यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है. फिलहाल सब्सिडी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी जो सिलेंडर निर्धारित सीमा के भीतर मिलेंगे, उन पर पहले की तरह लाभ मिलता रहेगा. सरकार का कहना है कि जरूरतमंद परिवारों को सहायता देने की उसकी प्रतिबद्धता पहले जैसी ही बनी हुई है.

मालूम हो कि हाल के महीनों में LPG सिलेंडर की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये तक पहुंच गई है. हालांकि, उज्ज्वला लाभार्थियों को 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद एक सिलेंडर करीब 642 रुपये में उपलब्ध हो रहा है. सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें अभी भी कई देशों की तुलना में कम हैं.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति पर सरकार को औसतन करीब 1,600 रुपये का खर्च आता है. इसमें से लगभग 1,000 रुपये की सहायता सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं को दी जाती है. सरकार वर्ष 2022 से अब तक करीब 52,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे चुकी है. वहीं तेल विपणन कंपनियों को भी एलपीजी की बिक्री पर प्रति सिलेंडर करीब 700 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते कंपनियों पर दबाव बढ़ा है. सरकार का कहना है कि इन्हीं आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए योजना में यह बदलाव किया गया है.