E20 पेट्रोल से गाड़ी खराब हुई तो कंपनी बदलेगी पुर्जे मुफ्त: गडकरी

नई दिल्ली 11 जुलाई 2026 : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, सरकार ने वाहन निर्माता कंपनियों को निर्देश दिया है कि 20% एथेनॉल मिश्रित (E20) पेट्रोल के कारण यदि 2023 से पहले की पुरानी गाड़ियों में खराबी आती है, तो कंपनियां बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उनके पार्ट्स बदलेंगी। उन्होंने दावा किया कि एथेनॉल से गाड़ियां खराब होने के सोशल मीडिया पर चल रहे दावे मनगढ़ंत हैं, हालांकि उन्होंने पुरानी गाड़ियों का माइलेज थोड़ा कम होने की बात स्वीकार की है।

पुरानी गाड़ियों के रबर वॉशर्स मुफ्त में बदलने के सख्त निर्देश

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, सरकार ने वाहन कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सर्विसिंग के दौरान ग्राहकों से बिना कोई अतिरिक्त शुल्क लिए प्रभावित पुर्जों को बदला जाए। उन्होंने बताया कि पहले सर्विसिंग के लिए आने वाली पुरानी कारों में वॉशर्स धातु (मेटल) के बने होते थे, जबकि अब ये रबर के बनाए जा रहे हैं। सरकार के नए निर्देशों के तहत, सर्विसिंग के समय इन रबर वॉशर्स को पूरी तरह से मुफ्त बदला जाएगा ताकि पुरानी गाड़ियों के मालिकों को कोई असुविधा न हो।

सोशल मीडिया पर गाड़ियों के खराब होने के दावे पूरी तरह मनगढ़ंत

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर E20 फ्यूल की वजह से गाड़ियों के खराब होने या उन्हें भारी नुकसान पहुंचने की खबरों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी रणनीति के तहत तैयार किया गया झूठा और मनगढ़ंत नैरेटिव करार दिया। नितिन गडकरी ने चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें ऐसी एक भी कार दिखाई जाए जो इस एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण खराब हुई हो या बंद पड़ी हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक ऐसी किसी भी कार का मामला सामने नहीं आया है।

कम माइलेज की असली वजह और परफॉर्मेंस का गणित

नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल से माइलेज में आने वाली हल्की कमी के वैज्ञानिक कारणों को भी स्पष्ट किया। उनके अनुसार, पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू (ऊर्जा क्षमता) कम होती है, जिसके कारण माइलेज थोड़ा कम हो जाता है। इसके अलावा, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में भारी ट्रैफिक के कारण गाड़ियां लगातार निचले गियर में रुक-रुक कर चलती हैं, जिससे माइलेज गिरता है। हालांकि, हाईवे पर लगातार 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने पर यह अंतर स्पष्ट दिखाई देगा। परफॉर्मेंस के मामले में उन्होंने एथेनॉल को सामान्य पेट्रोल से बेहतर बताया, क्योंकि इसका ऑक्टेन नंबर हाई होता है और इसमें इंजन में आवाज न होने देने की क्षमता (एंटी-नॉकिंग प्रॉपर्टीज) काफी बेहतर होती है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में बदलाव और ब्राजील का सफल मॉडल

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष रूप से तैयार किए गए फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों में माइलेज की कोई समस्या नहीं है। वर्तमान में देश की करीब 12 ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्स मॉडल पर सक्रियता से काम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि ब्राजील वर्ष 1970 से ही 27% एथेनॉल ब्लेंड का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य आम जनता को अलग-अलग कीमतों पर फ्यूल ब्लेंड्स का विकल्प प्रदान करना है, और वर्तमान में एथेनॉल की कीमत करीब ₹75 प्रति लीटर है।

भारत में E20 पेट्रोल को लेकर क्यों बनी हुई है चिंता की स्थिति?

भारत में वर्तमान में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) को लेकर कुछ विरोध और चिंताएं देखी जा रही हैं। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों में इसे लेकर परेशानी है। वाहन मालिकों का कथित तौर पर दावा है कि इस नए फ्यूल मिश्रण के उपयोग से उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस (रखरखाव) का खर्च बढ़ गया है और इंजन के आंतरिक पुर्जे समय से पहले खराब हो रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में केंद्रीय मंत्री का यह बयान और सरकार का मुफ्त पार्ट्स बदलने का निर्देश काफी अहम माना जा रहा है।