नई दिल्ली 15 जुलाई 2026 : दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 17 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य और जीवन रक्षा को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बेहद कड़ा और संवेदनशील रुख अपनाया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को वांगचुक को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान करने, जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने और जीवन बचाने के लिए जरूरी होने पर ‘जबरन भोजन’ कराने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर दिया है।
इस मामले की गंभीरता और अर्जेंसी को समझते हुए अदालत ने किसी भी तरह की देरी न करते हुए कल ही (गुरुवार, 16 जुलाई) इस मामले की अगली सुनवाई तय की है।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बात को गंभीरता से नोट किया कि इतने संवेदनशील और आपातकालीन मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से कोई भी वकील कोर्ट में मौजूद नहीं था।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यह नोटिस राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) और स्टैंडिंग काउंसिल (सिविल) के जरिए तत्काल भेजा जाए, ताकि कल होने वाली सुनवाई में दोनों पक्षों का पक्ष रिकॉर्ड पर आ सके।
-चूंकि सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से बिना कुछ खाए भूख हड़ताल पर हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, ऐसे में कोर्ट ने माना कि उनके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। कोर्ट कल इस बात पर फैसला दे सकता है कि क्या उन्हें तुरंत जबरन अस्पताल में शिफ्ट कर ड्रिप या ट्यूब के जरिए लिक्विड/भोजन दिया जाए।
क्या मांग की गई है इस जनहित याचिका (PIL) में?
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर इस याचिका में सोनम वांगचुक की तेजी से बिगड़ती शारीरिक स्थिति का हवाला देते हुए कोर्ट से निम्नलिखित दखल की मांग की गई है:
केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि वे तुरंत डॉक्टरों की एक विशेष टीम जंतर-मंतर भेजकर वांगचुक की चिकित्सकीय जांच कराएं।
यदि डॉक्टरों की टीम उनकी हालत नाजुक बताती है, तो उन्हें तुरंत एम्स (AIIMS) या किसी अन्य बड़े सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए।
यदि उनके जीवन पर बन आती है, तो उनके मूल अधिकारों के तहत उन्हें जबरन भोजन या ग्लूकोज दिया जाए ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
अब पूरे देश की नजरें कल (16 जुलाई) दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली इस बेहद अहम सुनवाई पर टिकी हैं कि अदालत देश के एक बेहद सम्मानित नागरिक की जान बचाने के लिए प्रशासन को क्या सख्त आदेश जारी करती है।
