रेलवे विस्तार को मिली रफ्तार! ₹10,783 करोड़ की 3 बड़ी परियोजनाओं पर लगी मुहर

09 सितम्बर 2026 :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की 10,783 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

इन तीन रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी

मंजूर की गई परियोजनाओं में शामिल हैं—

  •     खड़गपुर–झारसुगुड़ा (बागडेही) चौथी लाइन
  •     कटनी–पेंड्रा रोड चौथी लाइन
  •     बिलासपुर (उस्लापुर)–पेंड्रा रोड तीसरी लाइन

इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मौजूदा नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम करना और ट्रेनों के संचालन को अधिक सुचारु बनाना है।

14 जिलों में बेहतर होगी रेल कनेक्टिविटी

इन तीनों परियोजनाओं के तहत पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर किया जाएगा। इससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लगभग 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इन गांवों की कुल आबादी करीब 56 लाख बताई गई है।

यात्रियों और पर्यटन को भी मिलेगा फायदा

रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। परियोजनाओं से जिन प्रमुख स्थलों की कनेक्टिविटी को लाभ मिल सकता है, उनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर शामिल हैं। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन और उससे जुड़े रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

माल ढुलाई की क्षमता भी बढ़ेगी

ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात जैसी प्रमुख वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। मल्टी-ट्रैकिंग और क्षमता विस्तार के बाद अतिरिक्त माल ढुलाई यातायात में करीब 27 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) की वृद्धि होने की संभावना है। इससे माल परिवहन की गति बढ़ने के साथ लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है।

PM गति शक्ति के तहत तैयार की गई परियोजनाएं

इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है। इसका उद्देश्य एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय के जरिए मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए अधिक निर्बाध रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।

पर्यावरण को भी होगा बड़ा फायदा

रेलवे को सड़क परिवहन की तुलना में पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन साधन माना जाता है। इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। परियोजनाओं के परिणामस्वरूप करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आने और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। सरकार के अनुसार, यह पर्यावरणीय लाभ करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

रेल नेटवर्क के विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी से निर्माण गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। बेहतर रेल संपर्क से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय बाजारों को भी लाभ मिल सकता है। सरकार के अनुसार, ये परियोजनाएं ‘न्यू इंडिया’ के विजन और आत्मनिर्भरता की दिशा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।