नई दिल्ली / 6 अगस्त 2025 — उत्तर भारत के प्रमुख राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश और पंजाब में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है, वहीं कई गांवों और कस्बों का संपर्क भी टूट चुका है। भारी बारिश और नदियों में छोड़े जा रहे पानी के कारण फसलें बर्बाद हो गई हैं, घर ढह गए हैं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
पंजाब: सतलुज का उफान, फसलें जलमग्न
पंजाब के गुरदासपुर और शहीद भगत सिंह नगर समेत कई जिलों में मंगलवार को भारी बारिश दर्ज की गई। हरिके हेड से 22 हजार क्यूसेक पानी सतलुज नदी में छोड़े जाने के बाद फिरोजपुर में बाढ़ की स्थिति बन गई है। इससे लगभग 150 एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई है। प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है।
बिहार: गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर खतरे से ऊपर
पटना में गांधी घाट पर गंगा नदी 1.15 मीटर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मनेर, हाथीदह और दानापुर जैसे क्षेत्रों में भी जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पटना के निचले इलाकों में कमर तक पानी भर चुका है।
खगड़िया, मुंगेर, सहरसा, कटिहार, समस्तीपुर, बक्सर और सुपौल जैसे जिलों में गंगा, बूढ़ी गंडक, कोसी और बागमती नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। सहरसा में कोसी नदी की धारा ने पक्की सड़क काट दी, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया।
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वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 1.39 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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स्कूलों में पानी घुसने से पढ़ाई प्रभावित
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हजारों लोग बाढ़ राहत कैंपों में शरण ले चुके हैं।
उत्तर प्रदेश: प्रयागराज, वाराणसी, चित्रकूट में तबाही
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। यहां 62 बस्तियां और 288 गांव प्रभावित हैं। 80 हजार लोग बेघर हो चुके हैं और 5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं।
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21 राहत शिविरों में 9,400+ लोग शरण लिए हुए हैं
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630 जवान राहत कार्य में जुटे
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330 नावें और 28 मोटर बोट लगाई गईं
वाराणसी में गंगा 97 सेमी ऊपर बह रही है। 86 घाट जलमग्न, गलियों में नाव चल रही हैं। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। 2 लाख से अधिक लोग प्रभावित, 7,500 से अधिक लोग विस्थापित और 1000 एकड़ फसल नष्ट हो चुकी है।
चित्रकूट, फतेहपुर और अन्य जिलों में भी बाढ़ ने कहर बरपाया है। यमुना के पानी से तीन दर्जन गांव घिरे, कई मकान ढहे, जान-माल का नुकसान हुआ।
प्रशासन और राहत बल अलर्ट पर
राज्यों के बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन विभाग, NDRF, SDRF, जल पुलिस और PAC राहत व बचाव कार्यों में जुटे हैं। ग्रामीण इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने, खाना और दवा पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
निष्कर्ष: सतर्कता और राहत की दरकार
उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश, नदियों में जलप्रवाह बढ़ने और बैराजों से पानी छोड़ने के कारण संकट और गहरा सकता है। प्रशासन को राहत कार्यों में तेजी लानी होगी और लोगों को सतर्कता बरतने की सख्त जरूरत है।
