छत्तीसगढ़ में बढ़ते बिजली बिलों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस ने महंगी बिजली दरों के विरोध में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की घोषणा की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि लगातार बढ़ते बिजली बिलों ने आम लोगों को बुरी तरह से परेशान कर दिया है।
बैज ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने 30 नवंबर तक बिजली दरों में कमी नहीं की, तो एसआईआर प्रक्रिया पूरी करते हुए दिसंबर के दूसरे सप्ताह में कांग्रेस कार्यकर्ता सीएम हाउस घेराव करेंगे।
कांग्रेस का आरोप: ‘बिजली उत्पादन में समृद्ध राज्य, फिर भी महंगी बिजली’
दीपक बैज का कहना है कि देश के सबसे बड़े विद्युत उत्पादक राज्यों में शामिल छत्तीसगढ़ में बिजली का महंगा होना सरकार की नीतिगत नाकामी है।
उन्होंने कहा कि—
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400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना बंद कर दी गई।
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दो साल में चार बार बिजली दरें बढ़ाई गईं।
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कोयले पर सेस हटने से कोयला सस्ता हुआ, पर सरकार ने बिजली दरों में कटौती नहीं की।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद कई उपभोक्ताओं की खपत सामान्य से अधिक दिख रही है, जिससे उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
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30 नवंबर तक बिजली के दाम घटाए जाएं।
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400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना फिर लागू हो।
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स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद की जाए।
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जहां मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां पुराने चेक मीटर से रीडिंग का मिलान कराया जाए।
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भूपेश बघेल सरकार की बिजली बिल हाफ योजना बहाल की जाए।
कांग्रेस का दावा है कि कोयले के दामों में करीब 400 रुपए तक की कमी आई है। ऐसे में सरकार वेरिएबल कॉस्ट एडजस्टमेंट (VCA) घटाकर बिजली सस्ती कर सकती है।
ग्रामीण क्षेत्र में बिजली कटौती पर भी कांग्रेस का हमला
बैज ने कहा कि महंगी बिजली देने के बावजूद सरकार 24 घंटे बिजली उपलब्ध नहीं करा पा रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़ 8–9 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है, जिससे किसान और ग्रामीण त्रस्त हैं।
दिसंबर में बड़ा आंदोलन संभव
कांग्रेस ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो दिसंबर में प्रस्तावित सीएम हाउस घेराव एक बड़े आंदोलन का रूप लेगा।
कांग्रेस का कहना है कि जनता के बढ़ते बिजली बिल और कटौती की समस्या को लेकर अब व्यापक जन—आंदोलन किया जाएगा।
