नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना का विशेष महत्व, भक्तों को मिलता है स्वास्थ्य, सुख और सकारात्मक ऊर्जा

चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन: मां कूष्मांडा की पूजा का विशेष महत्व 🙏

चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है।

कहा जाता है कि जब पूरे ब्रह्मांड में अंधकार ही अंधकार था, तब मां ने अपनी हल्की सी मुस्कान से पूरे सृष्टि की रचना की थी। इसी कारण उन्हें ऊर्जा, शक्ति और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। जो भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, उसके जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और नई ऊर्जा का संचार होता है।


मां कूष्मांडा का ध्यान मंत्र 🕉️

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा का ध्यान और मंत्र जाप करने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है।

मंत्र

वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्मांडा यशस्वनीम्॥

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥


चौथे नवरात्र की पूजा विधि 🌸

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • घर के मंदिर को साफ करके दीपक जलाएं
  • मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें
  • फूल, धूप, दीप और अक्षत अर्पित करें
  • मां को भोग लगाएं (खासकर कद्दू से बने व्यंजन)
  • दुर्गा चालीसा और मंत्रों का जाप करें
  • पूजा के अंत में मां की आरती करें

मां कूष्मांडा का शुभ रंग 💚

नवरात्रि के चौथे दिन हरा रंग पहनना शुभ माना जाता है। हरा रंग खुशहाली, विकास और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।


मां कूष्मांडा का प्रिय भोग 🍮

  • कद्दू (कूष्मांड) से बने व्यंजन
  • मालपुआ
  • मीठा प्रसाद

मान्यता है कि मां कूष्मांडा को कद्दू का भोग लगाने से वे जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं।


मां कूष्मांडा की आरती (लिरिक्स) 🙏

कुष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी ॥

पिंगला ज्वालामुखी निराली।
शाकंभरी मां भोली भाली ॥

लाखों नाम निराले तेरे।
भक्त कई मतवाले तेरे ॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा ॥

सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुंचाती हो मां अंबे ॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा ॥

मां के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी ॥

तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो मां संकट मेरा ॥

मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो ॥