राजधानी रायपुर में पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। इस कॉल सेंटर के जरिए अमेरिका और चीन के नागरिकों से ठगी की जा रही थी। मामले में पुलिस ने 42 युवकों को हिरासत में लिया है, जबकि गिरोह के मास्टरमाइंड अभी फरार हैं।
गुजरात के ठग चला रहे थे नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट को गुजरात के अहमदाबाद निवासी विकास शुक्ला और संजय शर्मा संचालित कर रहे थे। दोनों ने रायपुर के पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टावर में कॉल सेंटर के लिए ऑफिस किराए पर लिया था। इसके अलावा पाम बेलागियो में एक लग्जरी फ्लैट भी किराए पर लिया गया था।
मास्टरमाइंड खुद रायपुर में ज्यादा समय नहीं रुकते थे। वे कुछ दिनों के अंतराल में शहर आते, मैनेजरों को निर्देश और टारगेट देकर वापस अहमदाबाद लौट जाते थे। फिलहाल पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
12वीं पास युवकों को नौकरी
इस फर्जी कॉल सेंटर में 12वीं पास युवकों को 15 से 20 हजार रुपए मासिक वेतन पर काम पर रखा गया था। उन्हें कागज पर हिंदी में लिखकर दिया जाता था कि अंग्रेजी में विदेशी नागरिकों से क्या और कैसे बात करनी है।
टेलीग्राम से जुटाए विदेशी नंबर
आरोपी Telegram के जरिए विदेशी नागरिकों के मोबाइल नंबर जुटाते थे। इसके बाद उन्हें कॉल कर बैंक लोन, फ्रॉड ट्रांजेक्शन या CIBIL Score खराब होने का डर दिखाया जाता था।
डराने के बाद आरोपियों द्वारा पीड़ितों से बैंक डिटेल हासिल कर ली जाती थी और चाइनीज ऐप के जरिए ऑनलाइन चेक जनरेट कर लाखों डॉलर की ठगी की जाती थी।
अमेरिका के समय के अनुसार काम
पुलिस के अनुसार यह गिरोह भारत के समयानुसार रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक सक्रिय रहता था, क्योंकि उस समय अमेरिका में दिन होता है। इसी दौरान विदेशी नागरिकों को कॉल कर ठगी को अंजाम दिया जाता था।
तीन मुख्य प्रभारियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने कॉल सेंटर के तीन मुख्य प्रभारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें रोहित यादव, सौरभ सिंह और गौरव यादव शामिल हैं।
जांच में पता चला कि कॉल सेंटर के इंचार्ज को करीब 30 हजार रुपए मासिक वेतन दिया जाता था, जबकि कॉल करने वाले युवकों को 15 से 20 हजार रुपए तक भुगतान किया जाता था।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और फरार मास्टरमाइंड की तलाश जारी है।
