Manmohan Praharaj का विश्लेषण: CAPF सुधार बहस में संस्थागत संतुलन और समन्वय ही असली चुनौती

नई दिल्ली। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) को लेकर चल रही बहस अब केवल पदोन्नति और सेवा शर्तों तक सीमित नहीं रही। CAPF General Administration Bill, 2026 के बहाने देश की आंतरिक सुरक्षा संरचना, समन्वय तंत्र और संस्थागत डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

पूर्व डीजीपी Manmohan Praharaj ने इस पूरे विमर्श को व्यापक नजरिए से देखने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि CAPFs में सुधार जरूरी है, लेकिन यह सुधार ऐसा होना चाहिए जो पूरे आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करे, न कि उसे खंडित कर दे।

 

 

सेवा शर्तों से आगे का मुद्दा

 

प्रहराज के अनुसार, CAPFs अधिकारियों की करियर प्रोग्रेशन, पदोन्नति में ठहराव और सेवा शर्तों से जुड़ी समस्याएं वास्तविक हैं और लंबे समय से समाधान की मांग कर रही हैं।

 

लेकिन आंतरिक सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नीति निर्माण केवल “वितरण” (distribution) के आधार पर नहीं किया जा सकता। किसी भी बदलाव का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि उसका असर—

• समन्वय

• सूचना प्रवाह

• और संकट के समय प्रतिक्रिया

 

पर क्या पड़ेगा।

 

 

समन्वय: आंतरिक सुरक्षा की रीढ़

 

भारत जैसे विशाल और विविध देश में आंतरिक सुरक्षा हमेशा एक समन्वित ढांचे पर निर्भर रही है। स्वतंत्रता के बाद से ही इस बात पर जोर दिया गया कि विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बना रहे, ताकि संकट के समय विखंडन की स्थिति न बने।

 

इसी सोच के तहत ऐसी नेतृत्व प्रणाली विकसित की गई, जिसमें अधिकारी अलग-अलग संस्थानों और राज्यों में काम करते हुए एक व्यापक दृष्टिकोण हासिल करें।

 

 

कानूनी ढांचा और राज्य पुलिस की भूमिका

 

प्रहराज ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आंतरिक सुरक्षा का हर ऑपरेशन अंततः कानून और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा होता है।

 

FIR, साक्ष्य, गिरफ्तारी और अदालत से जुड़े सभी पहलू राज्य पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जो BNS, BNSS और BSA जैसे कानूनों के तहत संचालित होते हैं।

 

यही वजह है कि राज्य पुलिस को आंतरिक सुरक्षा का “कानूनी बैकबोन” माना जाता है।

 

 

नेटवर्क आधारित सुरक्षा प्रणाली

 

आज आंतरिक सुरक्षा एक जटिल नेटवर्क के रूप में काम करती है, जहां इंटेलिजेंस का तेज और सटीक प्रवाह बेहद जरूरी है।

 

प्रहराज के मुताबिक, विभिन्न संस्थानों में काम करने का अनुभव रखने वाले अधिकारी बेहतर समन्वय स्थापित करते हैं। यदि यह जुड़ाव कमजोर होता है, तो—

• निर्णय लेने में देरी

• अधूरी जानकारी

• और ऑपरेशन में असंगति

 

जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

 

 

अलगाव का खतरा

 

CAPFs में पूरी तरह स्वतंत्र नेतृत्व संरचना की मांग को लेकर भी उन्होंने सावधानी बरतने की सलाह दी।

 

उनके अनुसार, इससे अल्पकालिक लाभ मिल सकते हैं, लेकिन दीर्घकाल में संस्थागत अलगाव बढ़ने का खतरा है, जिससे—

• सूचना साझा करने में कमी

• संयुक्त ऑपरेशन में कमजोरी

• और समन्वय में गिरावट

 

देखने को मिल सकती है।

 

 

CAPF Bill 2026: संतुलन की कोशिश

 

प्रहराज ने माना कि CAPF General Administration Bill, 2026 CAPFs अधिकारियों की समस्याओं को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

इसमें—

• पदोन्नति के अवसर बढ़ाने

• कैडर प्रबंधन को स्पष्ट करने

• और संस्थागत पहचान मजबूत करने

 

जैसे प्रावधान शामिल हैं।

 

सबसे अहम बात यह है कि यह विधेयक मौजूदा समन्वय ढांचे को बनाए रखते हुए सुधार लागू करने का प्रयास करता है।