भोपाल 28 मई 2026 : उर्दू शायरी की दुनिया के मशहूर शायर और पद्मश्री सम्मानित बशीर बद्र का गुरुवार को 91 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने भोपाल स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से जूझ रहे थे और पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी।
15 फरवरी 1935 को अयोध्या में जन्मे बशीर बद्र आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के सबसे लोकप्रिय शायरों में गिने जाते थे। उनकी शायरी ने आम बोलचाल की भाषा में मोहब्बत, दर्द और रिश्तों को नई पहचान दी। उन्हें साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान भी मिला था।
उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबान पर हैं, जैसे—
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।”
और
“कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता।”
उनके निधन से साहित्य, ग़ज़ल और उर्दू अदब की दुनिया में शोक की लहर है।
