लंदन 25 जून 2026 : हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन की कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी को 100 करोड़ रुपए (यानि 10.7 मिलियन डॉलर) चुकाने का आदेश दिया है। बैंक आफ इंडिया के लिहाज से इसे बड़ी जीत माना जा रहा है। यह रकम नीरव मोदी द्वारा उनकी एक कंपनी (फायरस्टार डायमंड) के लोन के लिए दी गई पर्सनल गारंटी से जुड़ी है। लंदन की अदालत के जज साइमन टिंकलर ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि नीरव मोदी ने बैंक को जो पर्सनल गारंटी दी थी, उसके तहत वह इस रकम को चुकाने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं।
केस की सुनवाई के दौरान भगोड़े नीरव मोदी की कोर्ट ने एक नहीं सुनी। जज साइमन टिंकलर ने नीरव मोदी के सभी बहानों को खारिज करते हुए कहा कि नीरव मोदी के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि बैंक को उनका पैसा क्यों नहीं मिलना चाहिए। यह साफ है कि नोटिस उन तक पहुंचे थे, क्योंकि एक नोटिस तो सीधे उस लंदन की जेल में भेजा गया था जहां वह रह रहा है। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि 2018 में घोटाले की खबर आने के बाद नीरव मोदी ने खुद बैंक को ईमेल लिखकर माना था कि बैंकों का पैसा नहीं चुका पा रहा है।
नीरव मोदी इस समय लंदन की एक जेल में बंद है और भारत आने से बचने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में अब इस मामले में उसने बचने के लिए कोर्ट में कई दलीलें दीं कि बैंक की तरफ से उसे लोन चुकाने का कोई सही नोटिस मिला ही नहीं। भगोड़े नीरव ने इस बार बैंक के पैसे ना चुकाने पड़े, इसलिए यह बहाना भी दिए कि वह उस समय भारत में नहीं था, इसलिए उसे नोटिस नहीं मिले।
दरअसल, बैंक आफ इंडिया ने जुलाई 2012 में दुबई स्थित नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार डायमंड को कर्ज दिया था। अगस्त 2013 में नीरव मोदी ने खुद इस लोन की गारंटी ली थी कि अगर कंपनी पैसा नहीं चुकाएगी, तो वह चुकाएंगे। साल 2018 की शुरुआत में जब पीएनबी में नीरव मोदी के बड़े घोटाले की खबर सामने आई, तो बैंक आफ इंडिया ने अपना लोन वापस मांगना शुरू कर दिया। बैंक ने मार्च और अप्रैल 2018 में नीरव और उसकी कंपनी को नोटिस भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
