01 जुलाई 2026 : भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का एक और संकेत सामने आया है। जून 2026 में देश का गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) केलक्शन 13.9% की सालाना वृद्धि के साथ ₹1.95 लाख करोड़ के करीब पहुंच गया। यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, आयात से प्राप्त कर राजस्व में तेज बढ़ोतरी और बेहतर टैक्स अनुपालन ने GST संग्रह को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
घरेलू कारोबार से मिलने वाला ग्रॉस GST रेवेन्यू 6.5% बढ़कर 1.35 लाख करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर, आयात से मिलने वाला ग्रॉस GST रेवेन्यू 34.6 फीसदी की तेज बढ़ोतरी के साथ 60,038 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिसने कुल GST संग्रह में अहम योगदान दिया।
रिफंड एडजस्ट करने के बाद घरेलू नेट GST रेवेन्यू केवल 2.6% बढ़कर 1.17 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू लेनदेन में बढ़ोतरी अभी भी सीमित रही। इसके उलट, सीमा शुल्क (कस्टम्स) से मिलने वाला नेट GST राजस्व 42.2% बढ़कर 45,370 करोड़ रुपये हो गया, जो कुल GST संग्रह में आयात की मजबूत भूमिका को दर्शाता है।
जून के दौरान GST रिफंड 29.1 फीसदी बढ़कर 32,436 करोड़ रुपये रहा। इसमें घरेलू रिफंड 42.9 फीसदी बढ़कर 17,767 करोड़ रुपये और आयात पर चुकाए गए GST का रिफंड 15.6 फीसदी बढ़कर 14,669 करोड़ रुपये हो गया। अगर पूरे वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) की बात करें, तो ग्रॉस GST कलेक्शन 8.4 फीसदी बढ़कर 6.32 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, नेट GST कलेक्शन 7.1 फीसदी बढ़कर 5.40 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
देश में जीएसटी राजस्व में हमेशा की तरह सबसे बड़ा योगदान देने वाले महाराष्ट्र का दबदबा इस बार भी कायम रहा। महाराष्ट्र का जीएसटी कलेक्शन 9 फीसदी बढ़कर 30,714 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। कर्नाटक में 10 फीसदी और दिल्ली में जीएसटी कलेक्शन में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
जून में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे शानदार और दमदार रहा है। यूपी का जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर रिकॉर्ड 19 फीसदी बढ़कर 9,165 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 7,675 करोड़ रुपये था। यूपी के बाद असम में 17%, पंजाब में 14% और गुजरात में 12% की वृद्धि दर्ज की।
