भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी में इंडोनेशिया, रक्षा सहयोग होगा और मजबूत

07 जुलाई 2026 : इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम खरीदने का फैसला किया है। इस डील के साथ ही इंडोनेशिया, फिलीपींस के बाद ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी देश बन जाएगा। यह जानकारी इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रीको रिकार्डो सिराइट ने आज (9 मार्च) न्यूज एजेंसी राइटर्स को दी। उन्होंने बताया कि यह समझौता इंडोनेशिया की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और आधुनिक बनाने की रणनीति का हिस्सा है।रीको रिकार्डो सिराइट, के मुताबिक यह डील खास तौर पर इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। इंडोनेशिया एक बड़ा द्वीपीय देश है और उसकी समुद्री सीमाएं काफी विस्तृत हैं। ऐसे में समुद्र से जुड़ी सुरक्षा को मजबूत बनाना उसके लिए बेहद जरूरी माना जाता है। ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में भारत और रूस की जॉइंट कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने बताया था कि इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर बातचीत चल रही है। अनुमान लगाया गया है कि यह डील करीब 200 मिलियन से 350 मिलियन डॉलर (करीब 1,600 करोड़ से 2,900 करोड़ रुपए) के बीच हो सकती है।

ब्रह्मोस मिसाइल को ब्रह्मोस एयरोस्पेस बनाती है, जो भारत और रूस की सरकार की जॉइंट कंपनी है। यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है। इसकी स्पीड और सटीकता के कारण इसे आधुनिक युद्ध में बेहद प्रभावी हथियार माना जाता है।

ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की पहली विदेशी डील साल 2022 में फिलीपींस के साथ हुई थी। फिलीपींस, इंडोनेशिया का दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसी देश है। इस समझौते के तहत भारत ने पिछले साल फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप भी सौंप दी थी। इंडोनेशिया के साथ पूरी होने जा रही यह नई डील भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी की वैश्विक मांग बढ़ने का संकेत मिलता है।

ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस ने मिलकर विकसित की है और यह भारतीय सशस्त्र बलों के सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में से एक मानी जाती है। इसका इस्तेमाल भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों करती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज स्पीड और सटीक निशाना लगाने की क्षमता है। यही कारण है कि यह भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।