07 जुलाई 2026 : फिल्म ‘सतलुज’ हटाए जाने के कुछ घंटों बाद अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ इंस्टाग्राम पर लाइव आए। इस दौरान उन्होंने लोगों से कहा कि अगर किसी ने फिल्म डाउनलोड कर रखी है तो उसे देखें और दूसरों के साथ भी साझा करें। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट से किसी चीज़ को पूरी तरह हटाना आसान नहीं है।
दिलजीत ने बताया कि उन्हें पहले से ही अंदाजा था कि सरकार की ओर से ऐसा कदम उठाया जा सकता है। इसी वजह से फिल्म की टीम ने बिना किसी प्रचार के अचानक इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने का फैसला किया था।
फिल्म ‘सतलुज’ शुक्रवार शाम ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बावजूद रविवार शाम, यानी 48 घंटे से भी कम समय में इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।
यह फिल्म दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। उन्होंने पंजाब में आतंकवाद के दौर के दौरान हुई कथित फर्जी मुठभेड़ों और बिना कानूनी प्रक्रिया के हुई हत्याओं की जांच की थी। यह फिल्म साल 2023 से ही रिलीज के लिए संघर्ष कर रही थी।
फिल्म के निर्माता आरएसवीपी मूवीज़ ने पुष्टि की कि सरकार के निर्देश पर फिल्म को हटाया गया। वहीं कुछ सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया कि फिल्म के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जा सकता है, इसलिए यह फैसला लिया गया।
इंस्टाग्राम लाइव के दौरान दिलजीत दोसांझ ने कहा, “मुझे इसमें कोई हैरानी नहीं हुई। मुझे पहले से पता था कि फिल्म रिलीज होने के बाद इसे हटाया जा सकता है। मैंने सोचा था कि सोमवार को दफ्तर खुलने के बाद ऐसा होगा, लेकिन यह रविवार को ही हो गया। यही वजह थी कि हम फिल्म का प्रचार भी नहीं कर पाए। अगर पहले से प्रचार करते तो शायद फिल्म कभी रिलीज ही नहीं हो पाती।”
उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि फिल्म कुछ समय के लिए ही सही, लेकिन लोगों तक पहुंच गई।दिलजीत ने कहा, “हमारी मेहनत दर्शकों तक पहुंच गई, यही सबसे बड़ी बात है। मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं। हमारी पूरी टीम को बधाई। हमने जो चाहा था, वह पूरा हुआ। अब यह आपकी फिल्म है, आप इसे जैसे चाहें वैसे देखें।”
उन्होंने आगे कहा, “बिना किसी को बताए अचानक फिल्म रिलीज करना ही एकमात्र तरीका था। अगर हम दो दिन पहले भी इसकी घोषणा कर देते, तो यह फिल्म लोगों तक नहीं पहुंच पाती। आज सुबह मैंने एक वीडियो भी देखा, जिसमें गुरुद्वारे में यह फिल्म दिखाई जा रही थी।”
दिलजीत दोसांझ ने फिल्म बनाने के दौरान आई मुश्किलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस फिल्म को रिलीज कराने के लिए टीम पिछले चार साल से संघर्ष कर रही है।
उन्होंने कहा, “अगर किसी फिल्म को रोकने या बैन करने की कोशिश करेंगे तो लोग उसके बारे में और ज्यादा बात करेंगे। मेरी सलाह है कि फिल्म को रिलीज होने दें। इंटरनेट पर एक बार कोई चीज आ जाए तो उसे पूरी तरह हटाया नहीं जा सकता। जिन आवाज़ों को सालों पहले दबाया गया था, आज भी उन्हें दबाने की कोशिश हो रही है।” उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान भी कई बार काम रुक गया था।
दिलजीत ने कहा, “फिल्म की शूटिंग कई बार 8 से 10 दिनों तक रुकी रही। अपने ही लोगों ने भी काफी परेशान किया। मैं हनी त्रेहान को सलाम करता हूं। उन्होंने इस फिल्म के लिए अपना सब कुछ लगा दिया। मेरी इच्छा है कि यह फिल्म फिर से ZEE5 पर आए। हमारे लिए पैसे से ज्यादा जरूरी है कि यह फिल्म ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।”
जब लाइव के दौरान कई लोगों ने बताया कि उन्होंने फिल्म हटने से पहले डाउनलोड कर ली थी, तो दिलजीत ने खुशी जताते हुए कहा, “अच्छा हुआ आपने डाउनलोड कर ली। मैंने पहले ही इशारा कर दिया था। हमेशा मेरी बात समझा करो। हनी पाजी ने इस फिल्म पर बहुत मेहनत की है।”
उन्होंने आगे कहा, “अब चाहे जितना ब्लॉक कर लो, लोगों के पास फिल्म डाउनलोड है। अब क्या करोगे? अगर कोई सोचता है कि इंटरनेट से किसी चीज को पूरी तरह मिटाया जा सकता है, तो वह या तो अनजान है या फिर उसे इसकी जानकारी नहीं है।”
फिल्म हटाए जाने के बाद ZEE5 ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ‘सतलुज’ फिलहाल भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी। हम सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जल्द से जल्द इस फिल्म को फिर से दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।”
इससे पहले भी दिलजीत ने इंस्टाग्राम लाइव में लोगों से कहा था कि फिल्म जल्दी देख लें, क्योंकि इसे कभी भी हटाया जा सकता है।
करीब तीन साल तक चले सेंसर विवाद के बाद फिल्म बिना किसी कट के ZEE5 पर रिलीज हुई थी। हालांकि इसका नाम ‘पंजाब 95’ से बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया गया।
यह विवाद साल 2023 में शुरू हुआ, जब फिल्म का प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में होना था। लेकिन आखिरी समय में फिल्म को फेस्टिवल से भी वापस लेना पड़ा।
भारत में रिलीज के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म में 127 बदलाव करने की मांग की थी। इनमें फिल्म का नाम बदलना और पंजाब से जुड़े कई संदर्भ हटाना भी शामिल था।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में फिल्म दिखाने के लिए सीबीएफसी की मंजूरी जरूरी नहीं होती, फिर भी निर्माताओं ने फिल्म को फेस्टिवल से हटा लिया।
पिछले साल निर्देशक हनी त्रेहान ने कहा था, “अगर अदालत के आदेश पर 150 कट भी लगाने पड़ें तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन अगर सरकार या सत्ता में बैठे लोग राजनीतिक कारणों से बदलाव चाहते हैं, तो यह सही नहीं है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा होनी चाहिए। मुझे नहीं लगता कि यह कोई प्रचार वाली फिल्म है या किसी सरकार के पक्ष में बनाई गई है।”
‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी पर आधारित है। उन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में कथित तौर पर 25,000 से अधिक लोगों की गैरकानूनी हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों का मामला सामने लाया था।
बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में खालड़ा के अपहरण और हत्या के मामले में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया गया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
इस फिल्म का निर्माण आरएसवीपी मूवीज़ और मैकगफिन पिक्चर्स ने मिलकर किया है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं।
