07 जुलाई 2026 : देश में E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार E25 पेट्रोल नीति को लागू करने में जल्दबाजी करती नजर नहीं आ रही है। सरकार ने भले ही E25 समेत उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों के लिए कानूनी और कर संबंधी तैयारियां शुरू कर दी हों, लेकिन इसके देशव्यापी रोलआउट पर रोक जैसी स्थिति बनी हुई है। दरअसल, केंद्र सरकार फिलहाल E25 यानी 25% एथेनॉल वाले पेट्रोल लागू करने की जल्दबाजी में नहीं है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों की चिंताओं और बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार इस फैसले को कुछ समय के लिए टाल सकती है। हाल के दिनों में कई सारे गाड़ियों के मालिकों ने E20 पेट्रोल से माइलेज कम होने, गाड़ी खराब होने और पुरानी गाड़ियों पर असर पड़ने की शिकायत की है। इसी वजह से सरकार अब E25 लागू करने से पहले और जांच, तकनीकी अध्ययन और चर्चा करना चाहती है।
E25 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 25% एथेनॉल और 75% पेट्रोल का मिश्रण होता है। भारत पहले ही E20 लक्ष्य हासिल कर चुका है, जिसके तहत पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया जा रहा है। अब सरकार भविष्य में E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों की संभावनाओं पर काम कर रही है।
फिलहाल देशभर में E20 पेट्रोल मिल रहा है। इस पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। सरकार का मकसद कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
सरकार ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) को E25 ईंधन का मौजूदा वाहनों पर प्रभाव जांचने की जिम्मेदारी दी है। अध्ययन में माइलेज, इंजन की स्थिति, रखरखाव लागत और वाहन प्रदर्शन जैसे पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। रिपोर्ट अगले वर्ष के अंत तक आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 से पहले निर्मित कई वाहन E10 या E20 मानकों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। ऐसे में E25 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के उपयोग से पुराने वाहनों में अतिरिक्त रखरखाव की जरूरत पड़ सकती है। कुछ रिपोर्टों में पुराने वाहनों के रबर पार्ट्स और फ्यूल सिस्टम पर प्रभाव की आशंका भी जताई गई है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से विदेशी मुद्रा बचत, तेल आयात में कमी और किसानों को अतिरिक्त आय का लाभ मिला है।
