महादेव सट्टा केस में बड़ा अपडेट: विकास गर्ग की न्यायिक रिमांड आगे बढ़ी

रायपुर 25 जुलाई 2026 :ऑनलाइन सट्टा एप मामले में विकास गर्ग को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. अगली पेशी 6 अगस्त 2026 को होगी. महादेव सट्टा एप मामले में विकास गर्ग को 14 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने दिल्ली से गिरफ्तार किया. जिसके बाद विकास गर्ग को ट्रांजिट डिमांड पर रायपुर लाया गया. 15 जुलाई को विकास गर्ग को रायपुर के कोर्ट में पेश किया गया. प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट से 10 दिनों की रिमांड की मांग की थी. जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए 24 जुलाई तक प्रवर्तन निदेशालय को रिमांड दे दी थी.

सट्टा ऐप मामले में विकास गर्ग से पूछताछ

प्रवर्तन निदेशालय के वकील सौरभ कुमार पांडेय ने बताया “महादेव ऐप के इन्वेस्टिगेशन के सिलसिले में यह जानकारी प्राप्त हुई थी कि विकास गर्ग नामक व्यक्ति के पास एप का बहुत सारा पैसा है, जो अलग-अलग तरीके से इन्वेस्ट किए गए हैं. कुछ फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट कुछ पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट और कुछ ऐसे तरीके हैं, जिसमें बैंक में कैश एंट्री दिखाई गई है. लगभग 940 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी अटैचमेंट की गई है. ED रिमांड के दौरान इससे संबंधित सवाल किए गए हैं.

सौरभ कुमार पांडेय ने आगे बताया कि जब किसी को अरेस्ट किया जाता है तो बेसिकली यह जानने का प्रयास किया जाता है कि दस्तावेजों से भी कंसर्न कराया जाता है. इंवॉल्वमेंट एजेंसी को जो दिखाई पड़ रहा है आपका इसमें क्या कहना है. अगर वह इसको वैध तरीके से कमाया गया बताता है तो उतने परसेंट प्रॉपर्टी उसमें ड्रॉप हो जाती है. लेकिन ED की पूछताछ में ऐसा कुछ देखने में नहीं आया. पूछे गए सवालों का उन्होंने सही तरीके से नहीं दिया.

वकील ने आगे बताया “मनी लॉन्ड्रिंग में महत्वपूर्ण बात है कि पकड़े गए आरोपी को उसमें अपनी सत्यता बतानी चाहिए. क्योंकि यहां पर नेगेटिव बर्डन है. मसलन पुलिस के केसेस आपको साबित करने का भार पुलिस पर रहता है, लेकिन मनी लांड्रिंग केस में इसका ठीक उल्टा है, इसमें पूरा भार एक्यूएस के ऊपर रहता है. न्यायालय को यह बताने का कि इसमें मेरी संलिप्तता नहीं है. अगर कोई सबसे अच्छा मौका था तो यही मौका था. क्योंकि अगर आप इसका आंसर अभी नहीं दे पा रहे हैं तो कोर्ट में आप डायरेक्टली किस प्रकार से बचाव कर पाएंगे ? यह सोचने वाली बात रहती है. प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा पूछताछ में पूरी तरह से सहयोगात्मक रूप नहीं रहा है.”

3000 करोड़ का सट्टा ऐप

सौरभ पांडेय आगे कहते हैं हमारी पूरी इन्वेस्टिगेशन में जो दिखाई पड़ा वह यह है कि विकास गर्ग का संबंध हरिशंकर टिबरेवाल से है. बेसिकली यह पैसा स्काई एक्सचेंज नाम का एक ऐप है, जिसमें इन्वेस्ट हुए हैं. पैसे जो भी आए हैं उसका इन्वेस्टमेंट दो प्रकार से हुआ है. पहला तरीका जो अपनाया गया, पैसा हवाला चैनल के थ्रू आया या जिस भी तरीके से आया. उस कैश को बैंक में एंट्री दिखाई गई और इसको इस तरीके से शो किया गया कि कंपनी में इतने कर्मचारी हैं. उनको सैलरी के रूप में जाता है. इस प्रकार से पहले अरेंजमेंट किया गया.

दूसरा इन्वेस्टमेंट या दूसरा तरीका वह यह था कि बड़ी-बड़ी फाइनेंशियल फॉर्म और इंस्टीट्यूशन में चाहे वह शेयर कैपिटल के रूप में हो या फिर चाहे वह फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के रूप में हो चाहे वह पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट के रूप में हो. ऐसा करके उस पैसे को इन्वेस्ट किया गया है. पैसे को ऐसी जगह में इन्वेस्ट किया जा रहा है जहां पर उसे पैसे की बढ़ोतरी हो रही है. इस प्रकार से जो अवैध कमाई है. यानी कि महादेव सट्टे से जो पैसा कमाया है उसको शेयर में इन्फ्यूज करके इन्वेस्टमेंट में इन्फ्यूज करके उससे लाभ कमाकर यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि यह संपत्ति निष्कलंकित है.