बिलासपुर 15 सितम्बर 2026 : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की पोस्टिंग और सेवानिवृत्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि सेवानिवृत्ति के अंतिम वर्ष में कर्मचारी को उसके गृह जिले में पदस्थापना देने के अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए। इस फैसले से ऐसे कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जो नौकरी के अंतिम पड़ाव में अपने परिवार और घर के करीब रहकर सेवा पूरी करना चाहते हैं।
अंतिम वर्ष में गृह जिले की मांग पर विचार
मामला एक सरकारी कर्मचारी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें सेवानिवृत्ति के करीब होने के कारण गृह जिले में पदस्थापना की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सेवा के अंतिम वर्ष में दूरस्थ स्थान पर पदस्थ रहने के कारण पारिवारिक और व्यक्तिगत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित अधिकारियों को कर्मचारी के अनुरोध पर नियमानुसार विचार करने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक जरूरतों को भी रखना होगा ध्यान में
कोर्ट के निर्देश का अर्थ यह नहीं है कि हर कर्मचारी को सेवानिवृत्ति से पहले अनिवार्य रूप से गृह जिले में पोस्टिंग मिल जाएगी। पदस्थापना प्रशासनिक आवश्यकता, उपलब्ध पद, विभागीय नियम और अन्य परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी।
ऐसे में कर्मचारी की मांग पर संबंधित विभाग को नियमों और प्रशासनिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना होगा।
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
सरकारी कर्मचारियों को सेवा के दौरान कई बार गृह जिले से दूर पदस्थापित किया जाता है। लंबे समय तक दूसरी जगह नौकरी करने के बाद सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचने पर परिवार के साथ रहने की इच्छा स्वाभाविक होती है।
खासकर ऐसे कर्मचारियों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, जिनकी सेवानिवृत्ति में केवल एक वर्ष या कुछ ही समय बचा हो। गृह जिले में पदस्थापना मिलने से उन्हें परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने और सेवानिवृत्ति से पहले अपने गृह क्षेत्र में सेवा देने का अवसर मिल सकता है।
