आज ललिता पंचमी पर मां ललिता की विशेष पूजा, जानें धार्मिक महत्व और आराधना विधि

नई दिल्ली 15 अक्टूबर 2026 : शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर आज, 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को ललिता पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन माता ललिता देवी को समर्पित है, जिन्हें त्रिपुरा सुंदरी और षोडशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति, ज्ञान और समृद्धि की कामना की जाती है। नवरात्र के दौरान आने वाली पंचमी तिथि पर मां शक्ति की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।

कौन हैं देवी ललिता?

हिंदू धर्म में देवी ललिता को आदिशक्ति का दिव्य स्वरूप माना जाता है। उन्हें त्रिपुरा सुंदरी और षोडशी नामों से भी पूजा जाता है। श्रीविद्या परंपरा में देवी ललिता की उपासना का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ललिता सौंदर्य, शक्ति, करुणा और ऐश्वर्य की प्रतीक हैं।

दस महाविद्याओं की परंपरा में षोडशी को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। भक्त इस दिन देवी की पूजा करके अपने जीवन में सकारात्मकता, आध्यात्मिक उन्नति और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

ललिता पंचमी पर पूजा का महत्व

ललिता पंचमी के दिन मां भगवती की आराधना, मंत्र जाप और ध्यान करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर उपवास रखते हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से देवी की उपासना करने से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है।

यह पर्व साधना, आत्मचिंतन और भक्ति के माध्यम से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा भी देता है। देवी की कृपा पाने के लिए भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं।

ललिता पंचमी पर कैसे करें पूजा?

ललिता पंचमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर माता ललिता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। देवी को पुष्प, फल, धूप और दीप अर्पित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई या अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं।

पूजा के दौरान देवी के मंत्रों का जाप और दुर्गा स्तुति का पाठ किया जा सकता है। अंत में माता की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। पूजा की विधि परंपरा और परिवार की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।