अब खतरा देखते ही खुद रुक जाएगी कार! अक्टूबर 2030 से नए मॉडल में जरूरी होगा ऑटो ब्रेक

24 अक्टूबर 2026 : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें 2030 तक भारत में बिकने वाली सभी नई पैसेंजर कारों में ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। अगर यह प्रस्ताव कानून बन जाता है, तो अक्टूबर 2030 से लॉन्च होने वाले सभी नए मॉडल्स और अक्टूबर 2032 तक मौजूदा सभी मॉडल्स में यह सेफ्टी फीचर स्टैंडर्ड होगा। यह कदम सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, जहां कारें टक्कर की आशंका होने पर ड्राइवर के एक्शन लेने से पहले खुद ही ब्रेक लगा सकेंगी।

ड्राफ्ट में क्या प्रस्तावित है?

AEB इस ड्राफ्ट का मुख्य आकर्षण है, लेकिन मंत्रालय ने कई अन्य सेफ्टी फीचर्स के लिए भी नियम प्रस्तावित किए हैं। ये नियम धीरे-धीरे लागू होंगे और इनका मकसद भारतीय सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों को सुरक्षित बनाना है।

स्टीयरिंग एफर्ट (AIS-193)

अक्टूबर 2027 से, सभी कारों, एसयूवी बसों और ट्रकों के लिए यह अनिवार्य होगा कि उनका स्टीयरिंग व्हील घुमाने में लगने वाला जोर एक तय मानक के अनुरूप हो। यह सुनिश्चित करेगा कि इमरजेंसी के समय ड्राइवर आसानी से गाड़ी को कंट्रोल कर सके। इसका सीधा मतलब यह हो सकता है कि भविष्य में बिकने वाले लगभग सभी वाहनों में पावर स्टीयरिंग स्टैंडर्ड फीचर बन जाएगा।

ऑटोमैटिक स्टीयरिंग फंक्शन (ACSF, AIS-193)

लेन-सेंटरिंग जैसे फीचर्स, जिनमें कार खुद स्टीयरिंग को कंट्रोल करती है, के लिए भी मानक तय किए गए हैं। अक्टूबर 2027 से, जिन कारों में यह फीचर होगा, उन्हें इन मानकों का पालन करना होगा। इसके अलावा, अक्टूबर 2029 से टैक्सी और अन्य कमर्शियल ट्रांसपोर्ट के तौर पर रजिस्टर्ड कारों के लिए यह फीचर अनिवार्य हो जाएगा।

इमरजेंसी लेन कीपिंग सिस्टम (ELKS, AIS-191 Part 1)

इसे आम भाषा में लेन कीप असिस्ट कहा जाता है। यह फीचर ड्राइवर के अनजाने में अपनी लेन से बाहर जाने पर गाड़ी को वापस लेन में ले आता है। अक्टूबर 2027 से, जिन कारों में यह फीचर दिया जाएगा, उन्हें भारतीय मानकों पर खरा उतरना होगा। अक्टूबर 2029 से यह टैक्सियों के लिए अनिवार्य होगा।

ड्राइवर ड्राउजीनेस और अटेंशन वार्निंग (AIS-184)

यह सिस्टम ड्राइवर की थकान या ध्यान भटकने के संकेतों को पहचानकर उसे ब्रेक लेने के लिए अलर्ट करता है। यह भी अक्टूबर 2027 से वैकल्पिक फीचर के तौर पर मानकों के तहत आएगा और अक्टूबर 2029 से टैक्सियों के लिए जरूरी हो जाएगा।

चाइल्ड-सीट माउंट्स (AIS-182)

हालांकि ड्राफ्ट में आईएसओफिक्स को अनिवार्य नहीं किया गया है, लेकिन यह प्रस्ताव है कि जिन कारों में आईएसओफिक्स एंकर, टॉप-टेदर पॉइंट या i-Size सीटिंग दी गई है, उन्हें एक साझा मानक का पालन करना होगा। यह नियम नए मॉडल्स के लिए अक्टूबर 2027 से और मौजूदा सभी मॉडल्स के लिए अक्टूबर 2028 से लागू होगा।

लगेज रिटेंशन (IS 15546:2005)

यह एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य प्रस्ताव है। इसके तहत, अप्रैल 2028 से सभी नए मॉडल्स और अक्टूबर 2028 से सभी मौजूदा मॉडल्स को एक ऐसा मानक पूरा करना होगा जो टक्कर की स्थिति में बूट में रखे सामान को उड़कर केबिन में आने से रोके।

प्रस्तावित टाइमलाइन

AEB को अनिवार्य करने का प्रस्ताव एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे अगले पांच सालों में तीन चरणों में लागू करने की योजना है। यह टाइमलाइन सुनिश्चित करती है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को इन बदलावों को अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिले।

आपके लिए इसका क्या मतलब है?

यह ड्राफ्ट अगर कानून बनता है तो कार खरीदने वालों और मालिकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जो लोग अभी कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस प्रस्ताव के कारण अपनी खरीद टालने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह अभी कानून नहीं है और मौजूदा कार मालिकों के लिए कोई भी फीचर रेट्रोफिट करने की मांग नहीं करता है।

अक्टूबर 2030 से लॉन्च होने वाले सभी नए मॉडल्स में AEB स्टैंडर्ड फीचर के तौर पर आएगा। वहीं, जो मॉडल्स पहले से बाजार में हैं, उन्हें अक्टूबर 2032 तक इस नियम का पालन करना होगा। इसका एक असर यह हो सकता है कि एंट्री-लेवल कारें महंगी हो जाएं, क्योंकि वर्तमान में ज्यादातर बजट कारों में यह टेक्नोलॉजी नहीं दी जाती है। ड्राफ्ट में इस लागत वृद्धि का कोई अनुमान नहीं दिया गया है।

हालांकि, इसका एक बड़ा फायदा क्वालिटी में सुधार होगा। 2028 से, AEB वाली हर कार को एक तय टेस्ट पास करना होगा, जिससे यह सिर्फ एक कागजी फीचर न रहकर असल में काम करने वाली तकनीक बनेगी। परिवारों के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि 2028 तक चाइल्ड-सीट माउंट और लगेज रिटेंशन के लिए ठोस मानक लागू हो जाएंगे, जो बच्चों की सुरक्षा बढ़ाएंगे। टैक्सी ड्राइवरों और ऑपरेटरों के लिए बदलाव जल्दी आएंगे, क्योंकि अक्टूबर 2029 से उनकी गाड़ियों में लेन-कीपिंग और ड्राउजीनेस अलर्ट जैसे फीचर्स अनिवार्य हो जाएंगे।