नई दिल्ली, 6 अगस्त 2025 — भारत की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की बैठक में लगभग ₹67,000 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद आवश्यकताओं को मंजूरी दे दी गई। यह निर्णय ऑपरेशन सिंदूर के बाद उत्पन्न सुरक्षा जरूरतों और भविष्य के युद्ध परिदृश्यों को देखते हुए लिया गया है।
सेना के लिए थर्मल इमेजर और रात्रि दृष्टि क्षमताओं में इजाफा
परिषद ने थर्मल इमेजर-आधारित ड्राइवर नाइट साइट्स की खरीद को हरी झंडी दी है, जिससे बीएमपी वाहनों की रात्रिकालीन संचालन क्षमता बेहतर होगी। इससे मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री की गतिशीलता और ऑपरेशनल दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
नौसेना को मिलेगी ब्रह्मोस और बराक-1 सिस्टम की ताकत
भारतीय नौसेना को अत्याधुनिक ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम, लांचर, और बराक-1 प्वाइंट डिफेंस मिसाइल सिस्टम के उन्नयन की मंजूरी दी गई है। साथ ही कंपैक्ट ऑटोनामस सरफेस क्राफ्ट की खरीद की जाएगी, जो पनडुब्बी रोधी अभियानों में खतरों की पहचान और उन्हें निष्क्रिय करने में मदद करेंगे।
वायुसेना को मिलेगा पर्वतीय रडार और स्पाइडर प्रणाली का उन्नयन
भारतीय वायुसेना की पर्वतीय क्षेत्रों में निगरानी क्षमता को मजबूत करने के लिए मल्टी-मोड रडार सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है। यह विशेष रूप से लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी को बढ़ाएगा। इसके साथ ही स्पाइडर एयर डिफेंस सिस्टम का उन्नयन किया जाएगा, जिससे यह एकीकृत वायु कमान एवं नियंत्रण प्रणाली (IACCS) के साथ बेहतर समन्वय में कार्य कर सकेगा।
तीनों सेनाओं के लिए मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन (MALE RPA)
डीएसी ने मध्यम ऊंचाई वाले लंबी दूरी के रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (MALE RPA) की खरीद को भी मंजूरी दी है। ये ड्रोन निगरानी, लक्ष्य निर्धारण और हमलों के संचालन में सक्षम होंगे और 24×7 युद्ध निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे।
महत्वपूर्ण रखरखाव अनुबंधों को भी मंजूरी
रक्षा परिषद ने वायुसेना के सी-17 और सी-130जे परिवहन विमानों के रखरखाव और एस-400 लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के वार्षिक व्यापक रखरखाव अनुबंध को भी स्वीकृति प्रदान की है।
रणनीतिक बढ़त की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह रक्षा खरीद निर्णय न केवल तीनों सेनाओं की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ावा देगा, बल्कि भविष्य के हाइब्रिड युद्ध परिदृश्यों और बदलते रणनीतिक खतरों से निपटने के लिए भारत को एक प्रौद्योगिकीय रूप से सक्षम सैन्य बल बनाएगा।
यह कदम भारत की ‘आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण’ नीति को भी गति देगा और घरेलू रक्षा उद्योग को सशक्त करने में मदद करेगा।
सारांश:
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₹67,000 करोड़ की रक्षा खरीद को मंजूरी
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सेना के लिए थर्मल इमेजर और नाइट साइट
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नौसेना के लिए ब्रह्मोस सिस्टम और बराक-1 अपग्रेड
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वायुसेना को मिलेगा पर्वतीय रडार और उन्नत स्पाइडर सिस्टम
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तीनों सेनाओं के लिए MALE RPA ड्रोन की खरीद
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सी-17, सी-130जे और एस-400 के रखरखाव अनुबंध स्वीकृत
