छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक हैरान कर देने वाला ठगी का मामला सामने आया है। कुसमी थाना क्षेत्र की एक आदिवासी महिला से पुलिस की नौकरी दिलाने के नाम पर 72 लाख रुपए की भारी भरकम ठगी की गई। महिला को सात साल तक यह विश्वास दिलाया गया कि वह मध्यप्रदेश के मशहूर पुलिस अधिकारी डीएसपी संतोष पटेल से बात कर रही है, जिनके सोशल मीडिया पर 2.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं।
फर्जी डीएसपी का भंडाफोड़ ऐसे हुआ
शिकायत मिलने के बाद कुसमी पुलिस असली डीएसपी संतोष पटेल तक पहुंची और बालाघाट में हॉक फोर्स में तैनात पटेल को दस्तावेज दिखाए। आवेदन में उनकी वर्दी वाली फोटो लगी थी। यह देख पटेल खुद हैरान रह गए और उन्होंने साफ कहा कि पीड़ित महिला से उनका कोई संपर्क नहीं रहा है।
जब पीड़ित महिला को असली डीएसपी ने वीडियो कॉल किया तब भी महिला मानने को तैयार नहीं थी। वह बार-बार कहती रही—“तुमने ही 72 लाख लिए हैं।” जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि महिला से बात करने वाला व्यक्ति कभी वीडियो कॉल पर नहीं आया, सिर्फ फर्जी फोटो भेजकर खुद को अधिकारी बताता रहा।
आरोपी निकला MP का जेसीबी ऑपरेटर
पुलिस की जांच में असली आरोपी की पहचान संतोष पटेल (उम्र 29), निवासी पड़खुरी पचोखर, थाना चुरहट, जिला सीधी (मध्यप्रदेश) के रूप में हुई। वह 2016 में छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में जेसीबी ऑपरेटर था। यहां उसकी पहचान कंजिया गांव की ललकी बाई से हुई, जो पास में बकरियां चराती थी।
काम खत्म होने के बाद वह गांव लौट गया और कुछ महीनों बाद महिला को फोन कर बोला—
“मैं एमपी पुलिस में डीएसपी बन गया हूं… मेरी नौकरी भी पैसे देकर लगी है, तुम्हारे दोनों बेटों को भी पैसे देकर भर्ती करा दूंगा।”
7 साल तक महिला को बनाया शिकार, जमीन तक बिकवाई
2018 से लेकर 2025 तक आरोपी महिला से फोन-पे समेत अन्य माध्यमों से पैसे लेता रहा।
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महिला ने रिश्तेदारों से कर्ज लिया
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अपनी जमीन बेच दी
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कई बार उधार लेकर आरोपी को पैसे देते रही
कुल मिलाकर ठगी की रकम लगभग 72 लाख रुपए तक पहुंच गई। आरोपी हर कुछ महीनों में नए बहाने से और पैसे मांगता था।
आरोपी गिरफ्तार, पुलिस कर रही है पैसों की जांच
छत्तीसगढ़ पुलिस ने आरोपी को 12 नवंबर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने ठगी की बात कबूल कर ली और बताया कि उसने सारा पैसा खर्च कर दिया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वह रकम कहां-कहां खर्च या निवेश की गई।
