रायपुर19 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि आधार कार्ड में दर्ज उम्र को अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुआवजा तय करते समय दावा अधिकरण (MACT) को रिकॉर्ड में उपलब्ध सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना होगा।
यह फैसला उन मामलों के लिए अहम माना जा रहा है, जहां दुर्घटना पीड़ित या मृतक की उम्र को लेकर अलग-अलग दस्तावेजों में भिन्न जानकारी दर्ज होती है और उसी के आधार पर मुआवजे की राशि प्रभावित होती है।
क्या कहा हाई कोर्ट ने?
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आधार कार्ड मुख्य रूप से पहचान के उद्देश्य से जारी किया जाता है। इसमें दर्ज जन्मतिथि या उम्र कई बार स्वयं घोषित जानकारी के आधार पर होती है। इसलिए केवल आधार कार्ड को आधार बनाकर उम्र तय करना उचित नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल को निम्न दस्तावेजों पर भी विचार करना चाहिए:
